भात भात कहते दम तोडना, यही है हकीकत आज हिंदुस्तान की ?

भूख से हर दिन भारत में लगभग ३००० जिन्दगिया तोड़ती है दम - विनय कुमार पाण्डेय अधिवक्ता /ब्लॉगर , डिस्ट्रिक्ट - महाराजगंज , उत्तर प्रदेश 

भारत के पहले प्राइम मिनिस्टर नेहरु जी ने अपने भाषण में ‘नियति से मिलाप’ में  गांधी जी 
 का नाम लिए बिना कहा भी था कि हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की यही महत्वाकांक्षा रही है कि हर एक व्यक्ति की आंख से आंसू मिट जाएं. 
झारखंड के
सिमडेगा  प्रखंड की ताताय नायक की 11 साल की बेटी संतोषी कुमारी की 28 सितंबर को मौत हो गई.  अधिकारी कहते हैं कि संतोषी की मौत भूख से नहीं हुई है बल्कि बीमारी से हुई है. उसके परिवार वाले कहते हैं कि उसकी मौत गरीबी व भूख के कारण हुई है. 
 रामचंद्र गुहा की किताब इण्डिया आफ्टर गांधी बताती है कि यदि भारत में कोई व्यक्ति गरीब है…तो बहुत संभावना है कि वह ग्रामीण क्षेत्र में रहता हो, बहुत संभावना है कि वह अनुसूचित जाति या जनजाति या अन्य सामाजिक रूप से भेदभाव के शिकार तबके का सदस्य हो सकता है, बहुत संभावना है कि वह कुपोषित, बीमार और बुरे स्वास्थ्य का शिकार हो, बहुत संभावना है कि वह निरक्षर हो या अच्छी शिक्षा से हीन हो जिसके साथ निम्न स्तर की दक्षता हो और बहुत संभावना है कि वह कुछ विशेष राज्यों में रहता हो…जैसे , राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उड़ीसा.मध्य प्रदेश .विश्व के कुल 92.5 करोड़ भूखों में से 45.6 करोड़ भारत में रह रहे हैं. इससे हर भारतीय को शर्मसार होना चाहिए और खासतौर पर लोकतंत्र के नाम पर शपथ लेने वालों को. जनता के प्रतिनिधि भूख के बढ़ते प्रकोप से बेपरवाह कैसे हो सकते हैं? क्या यह सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए कि लोकतंत्र में भूख विद्यमान क्यों रहती है? बढ़ती भुखमरी और कुपोषण इस बात के भी द्योतक हैं कि अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व भुखमरी के खिलाफ संघर्ष में ईमानदार नहीं है. भुखमरी सबसे बड़ा घोटाला है. यह मानवता के खिलाफ अपराध है, जिसमें अपराधी को सजा नहीं मिलती., भूख से मरने वालो का postmartam होने के बाद सरकारी अधिकारी यह कह के निकल जाते है की ''मरने वाला बीमारी से मर गया  था, '' 
हमारा suggestion यह है की जितने भी जन प्रतिनिधि है उनको यह जिम्मेदारी दे दिया जाय की की यदि उनके इलाके में अगर भूख से मौत हो तो उनकी यह जिम्मेदारी हो की वह उस मृतक के परिवार की पूरी जिम्मेदारी ले ?
वैसे इंडिया की यह क्रूर हकीकत है, अब यह हुक्मरानों को समझना है की वह इसके लिए बेहतर से बेहतर क्या कर सकते है ?

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